Latest

6/recent/ticker-posts

अगर मास्टरकार्ड का डेबिट या क्रेडिट कार्ड जेब में रखा है, तो जानिए बैन से आप पर क्या होगा असर

Ban On Mastercard: रिजर्व बैंक (RBI) ने डेटा स्टोरेज नियमों (Data Storage Rules) का पालन नहीं करने के कारण मास्टरकार्ड (Matercard) पर बैन लगा दिया है।

Ban On MasterCard
 

इसके तहत मास्टरकार्ड (Ban On Mastercard) 22 जुलाई के बाद नए डेबिट और क्रेडिट कार्ड (Debit & Credit Card) जारी नहीं कर पाएगी। इससे देश के फाइनेंशियल सेक्टर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि इससे बैंक नए कार्ड जारी नहीं कर पाएंगे। साथ ही उनकी कमाई और भुगतान जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होंगी।

आरबीआई ने इससे पहले अप्रैल में अमेरिकन एक्सप्रेस (American Express) के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की थी। मगर मास्टरकार्ड पर बैन (Ban On Mastercard) का ज्यादा असर हो सकता है क्योंकि भारतीय बाजार में उसकी पैठ अमेरिकन एक्सप्रेस के मुकाबले कहीं गहरी है। देश के कई बैंक मास्टरकार्ड के पेमेंट नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। इनमें आरबीएल बैंक भी शामिल है जो इस समय केवल मास्टरकार्ड नेटवर्क पर क्रेडिट कार्ड जारी करता है।

किस पर पड़ेगा असर


रॉयटर्स के एक विश्लेषण के मुताबिक देश के 11 घरेलू और विदेशी बैंक लगभग 100 तरह के डेबिट कार्ड जारी करते हैं जिनमें से एक तिहाई मास्टरकार्ड हैं। इसी तरह 75 से ज्यादा क्रेडिट कार्ड इस अमेरिकी कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। 2018 के नियमों के मुताबिक विदेशी कंपनियों को देश में पेमेंट का डेटा लोकल सर्वर पर रखना होगा। मास्टरकार्ड पर इन नियमों का पालन नहीं करने का आरोप है।

हालांकि केंद्रीय बैंक के इस फैसले का असर मौजूदा कस्टमर्स पर नहीं पड़ेगा लेकिन पेमेंट और बैंकिंग इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि इसका बैंकों पर व्यापक असर होगा। उन्हें वीसा (Visa) जैसी मास्टरकार्ड की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के साथ नए समझौते करने होंगे। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं। एक बैंक एग्जीक्यूटिव ने बताया कि वीसा पर जाने में 5 महीने तक का समय लग सकता है। अमेरिकन एक्सप्रेस और मास्टरकार्ड पर बैन से वीसा की चांदी हो गई है। क्रेडिट कार्ड मार्केट में पहले से ही उसका दबदबा है।

बैंकों का काम होगा प्रभावित


एक सीनियर बैंकर ने कहा कि इससे बैंकों का काम अस्थायी रूप से रुक जाएगा। उन्हें काफी मोलभाव करना होगा और कुछ समय के लिए उनका बिजनस चौपट हो जाएगा। अमेरिकी कंपनियों ने 2018 के नियमों में ढील देने के लिए आरबीआई में काफी लॉबिंग की थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। मास्टरकार्ड का कहना है कि उसे आरबीआई के इस फैसले से निराशा हुई है और वह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम करती रहेगी।

मास्टरकार्ड भारत को एक अहम बाजार मानती है। 2019 में उसने अगले 5 साल के भीतर एक अरब डॉलर के निवेश की घोषणा करते हुए कहा था कि वह भारत को लेकर बहुत उत्सुक है। 2014 से 2019 के बीच भी कंपनी ने भारत में एक अरब डॉलर का निवेश किया था। कंपनी के भारत में कई रिसर्च और टेक्नोलॉजी सेंटर हैं, जहां 4,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। यह अमेरिका के बाद किसी भी देश में कर्मचारियों की सबसे बड़ी संख्या है।

क्रेडिट कार्ड पर रिटर्न


देश में डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के जरिए भुगतान में काफी तेजी आई है। आरबीआई आंकड़ों के मुताबिक देश में 6.2 करोड़ क्रेडिट कार्ड और 90.2 करोड़ डेबिट कार्ड हैं जिनके जरिए कुल मिलाकर 40.4 अरब डॉलर का लेनदेन होता है। सूत्रों के मुताबिक वीसा पर जाने में देरी से बैंकों को फीस और कार्ड बिजनस से होने वाली दूसरी इनकम का नुकसान होगा। आरबीआई के फैसले पर एक रिसर्च नोट में Macquarie ने कहा कि बैंकों को नुकसान हो सकता है। क्रेडिट कार्ड उनके लिए प्रॉफिटेबल प्रॉडक्ट थे क्योंकि इन पर 5 से 6 फीसदी का रिटर्न मिलता है।

आरबीएल जैसे कुछ बैंकों की वेबसाइट पर 42 क्रेडिट कार्ड लिस्ट हैं जो सभी मास्टरकार्ड के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह यस बैंक (Yes Bank) के पास 7 मास्टरकार्ड हैं और एक भी वीसा कार्ड नहीं है। सिटीबैंक (Citibank) के पास चार मास्टरकार्ड क्रेडिट कार्ड हैं। आरबीएल ने एक बयान में कहा है कि उसने वीसा के साथ करार किया है लेकिन उसे लागू करने में 10 हफ्ते का समय लगेगा। यस और सिटीबैंक भी नए विकल्पों विचार कर रहे हैं।

Post a Comment

0 Comments